शुक्रवार 16 अक्टूबर 2026 - 22:38
इस्लामी मूल्यों की रक्षा और नई पीढ़ी की धार्मिक तरबीयत के लिए दृढ़ता और अमल ज़रूरी हैः आगा सय्यद मुहम्मद हादी मूसवी सफ़वी

बामना, बडगाम स्थित आयतुल्लाह सय्यद यूसुफ इमामबाड़े में नमाज़-ए-जुमा के अवसर पर मजलिस को संबोधित करते हुए हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आगा सय्यद मुहम्मद हादी मूसवी सफ़वी ने इस्लामी मूल्यों की रक्षा, नई पीढ़ी की धार्मिक तरबीयत तथा ईमान और अमल में दृढ़ता बनाए रखने पर ज़ोर दिया। उन्होंने हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा की सीरत को श्रद्धांजलि पेश करते हुए बीमारों की देखभाल और उनकी सेवा को एक पवित्र कर्तव्य बताया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाह सय्यद यूसुफ इमामबाड़े, बामना, बडगाम में नमाज़-ए-जुमा के अवसर पर अंजुमन-ए-शरई शियान के अध्यक्ष और आयतुल्लाह यूसुफ मेमोरियल ट्रस्ट के चेयरमैन हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आगा सय्यद मुहम्मद हादी मूसवी सफ़वी ने मजलिस को संबोधित करते हुए ईमान के साथ दृढ़ता और व्यावहारिक जीवन में इस्लामी मूल्यों का पालन करने पर ज़ोर दिया।

उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में विभिन्न बहानों से इस्लामी समाजों में धार्मिक मूल्यों को कमज़ोर करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने अज़रबैजान का उदाहरण देते हुए कहा कि पर्दे से संबंधित पाबंदियों के बावजूद मुस्लिम छात्राओं ने दृढ़ता का प्रदर्शन किया और पर्दे की ओर उनका रुझान और बढ़ा। उनके अनुसार, पश्चिमी समाज में दिखने वाली तरक्की के बावजूद यौन अनैतिकता एक गंभीर संकट का रूप धारण कर चुकी है, जबकि इसी तरह के नारों और विचारों को इस्लामी समाजों में भी बढ़ावा देने की कोशिशें की जा रही हैं।

आगा साहब ने उलमा और ख़ुतबा से आग्रह किया कि वे मुसलमानों, विशेषकर नई पीढ़ी को ईमान और अमल की प्रेरणा दें। साथ ही, विभिन्न वैचारिक और सांस्कृतिक प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए इस्लामी शिक्षाओं और सामाजिक मूल्यों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा की सीरत और बीमारों की सेवा का महत्व

आगा सय्यद मुहम्मद हादी मूसवी सफ़वी ने पाँच जमादिउल अव्वल को हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा की विलादत-ए-बासआदत का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान में इस दिन को ‘रोज़-ए-परस्तार’ यानी नर्स दिवस के रूप में मनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा परिवार के सदस्यों की देखभाल में गुज़रा। विशेष रूप से अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम, इमाम हसन मुज्तबा अलैहिस्सलाम और इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की देखभाल में आपने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने नर्सों और देखभाल करने वालों से अपील की कि वे बीमारों की सेवा पूरे ख़ुलूस और समर्पण के साथ करें, क्योंकि बीमारों की देखभाल और उनकी सेवा एक पवित्र कार्य तथा सम्माननीय पेशा है।

मजलिस के अंत में ज़िक्र-ए-मसाइब के बाद मुसलमानों की तरक्की, जागरूकता, एकता और आपसी सद्भाव तथा उम्मते मुस्लिम के गौरव और बुलंदी के लिए दुआ की गई।

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha